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Shayari sangrah

Hindi shayari


तनहा तनहा सा रहता हूं मेरी चाहत अधूरी रही है उसको दुनिया की हर खुशी देने की कोशिश किया रूठ जानेे की वजह न मालूम हुआ सादगी से मोहब्बत करता रहा जिंदगी के सफर में न कुछ भी हासिल हुआ 

ख्वाब देखा था जिंदगी हर वक्त खुशियों में गुजरेगी मगर मुकद्दर ने ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा किया सिर्फ अपनों के प्यार की आस लिए जिए जा रहा हूं

उसके झूठे वादों ने हजारों ख्वाब दिखा दिए जबसे हकीकत मालूम हुआ है मैं हैरान हूं तकलीफ हद से ज्यादा हो रही है क्यों वक्त रहते चालबाजी समझ नहीं पाया हूं shayari