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Shayari sangrah

Hindi shayari


तनहा तनहा सा रहता हूं मेरी चाहत अधूरी रही है उसको दुनिया की हर खुशी देने की कोशिश किया रूठ जानेे की वजह न मालूम हुआ सादगी से मोहब्बत करता रहा जिंदगी के सफर में न कुछ भी हासिल हुआ 

ख्वाब देखा था जिंदगी हर वक्त खुशियों में गुजरेगी मगर मुकद्दर ने ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा किया सिर्फ अपनों के प्यार की आस लिए जिए जा रहा हूं

उसके झूठे वादों ने हजारों ख्वाब दिखा दिए जबसे हकीकत मालूम हुआ है मैं हैरान हूं तकलीफ हद से ज्यादा हो रही है क्यों वक्त रहते चालबाजी समझ नहीं पाया हूं shayari

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Hindi shayari | हिंदी शायरी

मुझे वादों पर यकीन हो गया है तुम मेरे ख्वाहिशों को पूरा करोगी खुशियों में हर दिन गुजरेगा जिंदगी में कोई कमी न रह जाएगी तुम्हारे बगैर जीना गवारा नहीं होगा दिल की धड़कनों में रहने लगी हो बेतहाशा इश्क करने लगा हूं आजकल हर दिन अच्छी जिंदगी का ख्वाब बुनने लगा हूं किस्मत बदलने के आसार दिखने लगे हैं अगर तुम हमसफर बन जाओगी जिंदगी का गुजारा हो जाएगा कुछ इस तरह प्यार करने लगा हूं दूर रहना पड़ा तो दुनिया से अपना वजूद मिट जाएगा अच्छा कर्म करने से सम्मान मिलता है संघर्षों से समाज में पहचान मिलता है जब इंसान का नेक इरादा होता है जिंदगी में खुशियां लौटकर आती है फिर बंद किस्मत का द्वार खुलता है अपनी आंखों की खूबसूरत इशारों से मन का करार लूटा है एक पल भी दूर रहना मुश्किल हो गया है सब्र का बांध टूटा है दुआ करता हूं कोई चमत्कार हो जाए उम्र भर साथ रहने का जुगाड़ हो जाए

बेहतर जिंदगी का ख्वाब देखता हूं | Hindi shayari | shayari sangrah

बेहतर जिंदगी का ख्वाब देखता हूं मेहनत लगन ईमनदारी से काम करता हूं महसूस हो रहा है सभी ख्वाहिशें पूरी हो जाएगी उम्मीदों की रोशनी फैलने लगी है अंधेरों से निकलने लगे है अब मुकद्दर दस्तक देने लगी है जब इंसान का अच्छा दिन होता है पराए भी अपने हो जाते हैं बुरा वक्त अच्छे दोस्त की पहचान कराता है सही रास्ता मंजिल तक जाता है और गलत रास्ते असफलता की ओर अग्रसारित होते है

Shayari in Hindi | love shayari | Hakikat shayari

मेरे दिल की हकीकत से रूबरू होकर देखो सच्ची मोहब्बत हो जाएगी प्यार की तलाश में भटकते फिर रहे हो हर ख्वाहिश पूरी हो जाएगी हम यूं ही रुठे नहीं है उसकी गलतफहमी से ख्वाब टूटे हैं झूठ की दहलीज पर हकीकत का पर्दा यूं लग गया है मैं सफाई देने में नाकाम रह गया हूं शायद वह दर्द महसूस कर पाए आज भी खामोश रहकर इंसाफ चाहता हूं